दुश्मन -1

Dushman (part-1)

हाय, सभी रीडर को रोहन का प्यार भरा नमस्कार! मैं अन्तरवासना साइट पर अपनी पहली कहानी लिखने जा रहा हूं. आशा है कि मेरी ये कहानी आप सभी को बहुत पसंद आयेगी. और आप लोगों के लिए ये कहानी इंजॉय से भरपुर होगी. हर किसी की जिंदगी में कुछ पल ऐसे आ जाते है जिनकी वजह से ज़िंदगी जीना बहुत कठिन हो जाता है. कुछ लोग ऐसे पल मे सम्भल जाते हैं और कुछ लोग इसमे फंसते ही जाते हैं.
एक ऐसी ही कहानी मैं आप लोगों के लिए लेकर आया हूं.
दोस्तो कहानी पढ़ने के बाद आप मुझे अपनी राय जरूर दे.
मेरे घर में….
मेरे डेड =अशोक (उम्र 52)
मेरी मम्मी =निर्मला अशोक (उम्र 47)

हम इंदौर में रहते हैं. बात दो साल पहले की है बड़े भैया (उम्र 25) की शादी हो गई थी , शादी के बाद अच्छी जॉब मिल गई मुंबई मे इसीलिए भैया और भाभी को मुंबई मे जाना प़डा. महीने में एक दो बार आते हैं मिलने. और छोटे भैया को कॉलेज मे एडमिशन लेना था. इसीलिए छोटे भैया भोपाल मे कॉलेज होस्टल चले गये . और मैं क्लास 8th मे था. घर में सिर्फ मैं, मम्मी और पापा ही थे. पापा अपना एक्सपोर्ट का बिजनेस करते हैं और उसमें ही बिजी रहते हैं और मम्मी हॉउस वाइफ है. घर का ही सारा काम करती है. और कभी कभी घर के काम से फ्री होने के बाद मुझे स्कूल मे लेने आ जाती थी. हमारे बाजू वाले फ्लैट मे एक अंकल रहते हैं जिनका नाम असलम है अंकल बहुत बड़े प्रॉपर्टी डीलर है अंकल के दो बेटे है और हमारी सोसाइटी मे उनके दो फ्लैट है. अंकल पापा के बड़े क्लाइंट मे से एक थे. दरअसल उनकी फॅमिली से हमारी कभी नहीं बनती थी किसी ना किसी बात पर झगड़ा हो जाता था शायद इसीलिए की हम उनको पसंद नहीं करते थे और वे लोग हमे. लेकिन झगड़ा जादा नहीं होता था जिसकी वजह से कभी कभी मुसीबत मे हम दोनों ही एक दूसरे के काम आ जाते थे. लेकिन घर की बात सोसाइटी तक ही सीमित रहती थी इस बात का असर पापा और अंकल के बिजनेस को आजतक नहीं हुआ था. अंकल ने 5 साल पहले दूसरी सोसाइटी मे नया फ्लैट लिया था उसके बाद उनकी फॅमिली वहीं शिफ्ट हो गयी. और यहां कभी कभार सिर्फ अंकल ही आते थे और अपना ऑफिस का काम करते थे. सबकुछ ठीक चल रहा था फिर एक दिन पता नहीं केसे अपने बिजनेस काम को लेकर पापा और अंकल के बीच झगड़ा हो गया. और झगड़ा इतना होने लगा था कि दोनों ही एक दूसरे की जान के दुश्मन बन गए. और अंकल ने तो पापा के ऊपर केस भी कर दिया था जिसकी वजह से पापा बहुत परेशान हो गए. और घर मे मम्मी भी बहुत परेशान हो गयी थी. फ़िर थोड़े दिन बाद पुलिस आयी और पापा को उठाकर ले गई. और उल्टे उल्टे चार्जर्स लगा दिए. जिसकी बजह से पापा को 3 महीने के लिए जैल जाना पड़ गया.

फिर असलम अंकल ने पापा की डील भी केन्सल कर दिए. उससे हमे बहुत बडा नुकसान हो गया. हम काफी परेशान हो गए थे. हम सोच भी नहीं सकते थे कि ऐसा भी दिन देखने को मिलेगा. 2 दिन बाद बड़े भैया और भाभी भी आ गए. और हमारे रिश्तेदार भी आ गए. सब ने बहुत कोशिश की लेकिन पापा को ज़मानत नहीं मिल रहीं थीं. क्यूंकि अंकल ने बहुत बड़ा वकील किए हुए थे. 20 दिन हो चुके थे किसी से कुछ भी नहीं हो पाया. भैया की जॉब थी भैया जादा दिन रुक नहीं सकते थे. भैया का जाने का दिल बिल्कुल भी नहीं कर रहा था लेकिन भैया मजबूर थे कोशिश तो बहुत की लेकिन कुछ हुआ नहीं.

मम्मी =ठीक है बेटा तुम लोग जाओ अब तो जो भगवान ने चाहा है वहीं होगा. कहकर ममी थोड़ी रोने लगी. उसके बाद भैया और भाभी चले गए. मम्मी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि अखिर वो करे तो करे क्या, किससे मदत मांगे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मम्मी सब रिश्तेदारों से जाकर मिल रहीं थीं लेकिन कहीं भी काम नहीं बन रहा था. रिश्तेदार भी बहुत घूमे लेकिन उनसे भी कुछ नहीं हुआ. मम्मी रोज पूजापाठ करती और प्राथना करती भगवान से की उनकी समस्या जल्दी ही खत्म हो जाय. लेकिन समस्या खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी. फ़िर एक दिन असलम अंकल उनके घर आए थे. और जब ममी को पता चला कि असलम सोसाइटी मे आए है तब मम्मी उनके घर जाने लगी. मम्मी बहुत गुस्से मे थे.

मम्मी ने अंकल के घर की घंटी बजायी. अंकल ने दरवाजा खोला.
मम्मी = (गुस्से में) क्यूँ कर रहे हैं आप ये सब क्या बिगाड़ा है हमने आपका. शर्म आनी चाहिए आपको…
अंकल =देखो आप मुझसे बात ना ही करे तो अछा हैं.
मम्मी = अखिर क्या किया हमने जो आप इतनी दुश्मनी निकाल रहे है.
अंकल = (थोड़े गुस्से मे) दुश्मनी मैं नहीं आपके पतिदेव निकाल रहे है जाईए पहले उनसे बात कीजिए.
कहकर अंकल ने दरवाजा बंद कर लिया. और फिर मम्मी घर आ गई. मम्मी बहुत गुस्से मे थी और अंकल को गालियां दे रही थी.
फिर एक दिन सोसाइटी की एक आंटी हमारे घर आयी. मम्मी और आंटी के बीच काफी बात चित हुयी.
आंटी =मुझे तो इस समस्या का एक ही उपाय नजर आ रहा है.

मम्मी = वो क्या..
आंटी = क्यूं ना असलम से ही बात करके देख लो.
मम्मी = कुछ फायदा नहीं, मैं कर चुकी हूं उनसे वो नहीं माने.
आंटी =इस तरह नहीं, प्यार से बात करो उनसे..
मम्मी =क्या मतलब आपका?
आंटी =मेरा वो मतबल नहीं है निर्मला बहन, मैं तो ये कहना चाह रही हूँ कि औरत अगर चाहे तो किसी भी मर्द को अपनी सारी के पल्लू से बाँध सकती है
मम्मी =ये क्या बोल रहीं हैं आप.
आंटी = सही बोल रहीं हूं. और यही आखिरी उपाय है निर्मला बहन. आप उनसे प्यार से , शांत तरीके से बात कीजिए, उनको अपनी बातों मे फंसा लीजिए और ये सब आपको ही करना है इसमे बुराई कुछ नहीं है आपको तो पता ही है कि आप ये सब नाटक कर रहीं है. और एक बार रोहन के पापा बाहर आ गए उसके बाद आपको उनसे कोई मतलब ही नहीं रखना है
मम्मी आंटी की बात सुनकर गहरी सोच मे डूब गई.

आंटी =देखिए मेरी तो यही राय है बाकी आपको जो ठीक लगे वो कीजिए.
उसके बाद आंटी चली गई. और मम्मी काफी देर तक सोच मे ही डूबी हुयी थी. दूसरे दिन भी असलम अंकल आए थे उनके फ्लैट मे, तो मम्मी उनके घर जाने लगी. मम्मी ने सिम्पल सारी पहन रखी थी. अंकल मम्मी को देखे.. और मम्मी शर्मिन्दगी मेहसूस करती हुयी खडी थी.
मम्मी = जी मेरी बात तो सुनिए आप.
अंकल = देखिए निर्मलाजी मैं कुछ नहीं कर सकता हूं.
मम्मी = देखिए ऐसा मत कीजिए. ऐसी क्या बात है जो आप इतने कठोर हो चुके हैं. मुझे बता दीजिए मैं उनको समझाने की कोशिश करूंगी. कहकर मम्मी हाथ जोड़ने लगी.
मम्मी को हाथ जोड़ते देख अंकल शायद शर्मिंदा हो गए.
अंकल = आप हमे शर्मिंदा कर रहीं है निर्मला जी . अंदर आइए.
फिर मम्मी अंदर चली गई.
अंकल =बैठिए.

मम्मी सोफ़े पर बैठ गयी और थोड़ी थोड़ी रोने लगी.
अंकल = (मम्मी को पानी की बोतल देने लगे) गलती अशोक (मेरे पापा) की है भाभी जी. जब हमारा झगड़ा हुआ तब उसने मुझे बरबाद करने की धमकी दी. मैं भी डर गया था कि कहीं ये मुझे सच मे बर्बाद ना कर दे. मैंने सोचा कि ये मुझे बर्बाद करे उससे पहले मैं इसे बर्बाद कर देता हूं. इसलिए मैंने ये सब किया. और मेरी दुश्मनी सिर्फ अशोक से है बाकी आप सब से नहीं.
मम्मी =देखिए आप ये दुश्मनी यही खत्म कर दीजिए, मैं आपसे विनती कर रहीं हूं मैं उनको भी समझा दूंगी.
अंकल = ठीक है निर्मला जी मैं सिर्फ आपके कहने पर ऐसा कर रहा हूं. फ़िर अंकल ने अपने वकील को फोन कर मामला रफा-दफा करने बोले. ठीक है निर्मला जी हो गया काम.
मम्मी =शुक्रिया आपका बहुत.
अंकल =ज़ी..

उसके बाद मम्मी घर आ गई. अब मम्मी थोड़ी नॉर्मल दिख रही थी और थोड़ी खुश भी. और फिर दो दिन बाद ही पापा आ गए. पापा को देख मम्मी बहुत खुश हो गयी थी लेकिन पापा बहुत गुस्से मे थे. ग़ुस्सा होना भी जायज था क्यूँ की असलम अंकल की बजह से पूरी सोसाइटी मे बदनाम हो गए. मम्मी पापा को बार बार समझाने की कोशिश कर रहीं थीं और फिर भैया भी फिर 2 दिन के लिए आए पापा से मिलने. भैया भी पापा को गुस्सा शांत रखने बोले. और उसी दिन असलम अंकल हमारे घर आए. असलम अंकल को देख हम चौंक गए. असलम अंकल पापा से माफी मांगे और बोले कि मैं अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूं हो सके तो मुझे माफ कर देना. और फिर अंकल ने 20 लाख की जो प्रॉपर्टी डील कैन्सल की थी उसका चेक और 5 लाख का चेक पापा को जो परेशानी हुयी उसके लिए..
पापा ये सब देख रहे थे. फ़िर अंकल जाने लगे.
मम्मी =रुकिए….

यह कहानी आप mxcc.ru में पढ़ रहें हैं।

अंकल रुक गए. और मम्मी पापा को देखती हुयी. 5 लाख का चेक उठा कर अंकल को देने लगी.
मम्मी = हमे ये 5 लाख नहीं चाहिए आप इसे वापस ले लीजिए
अंकल = (पापा से) अशोक मैं जानता हूं कि तुम मुझे माफ नहीं करोगे लेकिन एक दोस्त समझ कर, अपना पड़ोसी समझकर ही रख लो इसे.
भैया = अंकल हम तो आपको हमेशा ही पड़ोसी समझते आ रहे हैं लेकिन आपने इतना कुछ करने से पहले एक बार भी नहीं सोचे.
अंकल =बेटा मुझसे गलती जरूर हुयी है लेकिन मैं गलत इंसान नहीं हूं. मुझे अपनी गलती पर अफसोस जरूर है लेकिन मैं तो आप लोगों से माफी भी नहीं मांग सकता. अशोक अगर मुझे माफ करने का दिल ना करे तो कल ये 5 लाख का चेक आकर मेरे मुह पर मार देना. और जो तुम सजा देना चाहो वो मुझे मंजूर होगी. खुदा आफिस…..
कहकर अंकल चले गए. फ़िर मम्मी पापा से बात करने लगी और उनको समझाने की कोशिश करने लगी.. धीरे धीरे हालत पहले की तरह होने लगे पापा को जो नुकसान हुआ था उसकी भरपाई असलम अंकल ने कर दी थी इसलिए अब पापा को कोई तकलीफ नहीं हुयी अपना बिजनेस सम्भालने मे. अब हमारे घर मे अंकल के बारे मे कोई बात नहीं होती और जब कभी होती तब अंकल के लिए गालियां ही निकलती थी,खासकर मम्मी के मुह से. मम्मी पापा से अंकल के बारे मे अनाप-शनाप बोलने लगती थी. क्यूंकि मम्मी को बहुत चीड़ हो गयी थी अंकल से. सबकुछ पहले की तरह ठीक हो चुका था फिर एक दिन मम्मी मुझे स्कूल मे लेने आयी थीं जब हम घर की तरफ आने लगे तब स्कूल से थोड़ी दूरी पर हमे असलम अंकल मिले. अंकल अपनी कार के साथ खड़े थे. अंकल मम्मी को देख स्माइल किए. मम्मी अंकल को देख गुस्सा हो रहीं थीं लेकिन अपना गुस्सा चाह कर भी दिखा नहीं सकीं. मम्मी सारी पहनी हुयी थी और सारी का पल्लू सर पर था. अंकल की फ्रेंच दाढ़ी थी मूछें हल्की हल्की थी.

अंकल= (स्माइल करते हुए) नमस्ते भाभी जी.

मम्मी =जी नमस्ते. आप यहाँ?
अंकल = कुछ काम से आया था. अब तो सब ठीक है घर मे.
मम्मी = जी सब ठीक हैं… शुक्रिया आपका..
अंकल = सिर्फ शुक्रिया से काम नहीं चलेगा भाभी जी.
मम्मी = क्या मतलब..?
अंकल =मेरा मतबल है.,हमने जो भी किया सिर्फ आपके लिए किया और आप है कि हमे एक कप चाय के लिए भी नहीं पूछी.
कहकर अंकल थोड़े हंसे और मम्मी भी थोड़ी स्माइल कर दी.
मम्मी =ठीक है आज आ जाईए.
अंकल = ओह्ह शुक्रिया आपका, 3 बजे आना होगा मेरा.
मम्मी =जी… फ़िर मम्मी मेरा हाथ पकड़ चलने लगी.
मैंने मम्मी से इस बारे मे पूछा तो मम्मी गुस्सा हो गई.

मम्मी =तू सिर्फ अपनी पढाई से मतलब रखा कर जादा यहां वहा ध्यान देने की जरूरत नहीं तुझे. फ़िर मैं चुप हो गया. घर मे भी मम्मी बहुत गुस्से मे बड़ बड़ कर रहीं थीं और अंकल के बारे में ही कुछ गंधा बोल रहीं थीं. 3 बजने वाले थे मम्मी किचन मे जाकर चाय बना दी. शायद मम्मी को पता था कि अंकल जरूर आयेंगे.
और फिक्स 3 बजे ही घंटी बजी. मम्मी जाकर दरवाजा खोल दी. सामने अंकल खड़े थे और स्माइल कर रहे थे. मम्मी उनको देख अंदर आना का इशारा की.
फिर अंकल अंदर आकर सोफ़े पर बैठ गए. अंकल व्हाइट कुर्ता पाजामा मे थे और सिर पर टोपी थी.
मम्मी किचन से चाय लेकर आयी और प्याली मे डालने लगी.
अंकल =भाभी बहुत बहुत शुक्रिया आपका.

मम्मी = असलम जी शुक्रिया तो मुझे आपका करना चाहिए आपने मेरी बात जो रख ली..
फिर मम्मी अंकल को चाय देने लगी और अंकल अपने हाथ आगे कर मम्मी को देखते हुए, मम्मी के हाथ को टच करते हुए कप ले लिए.. मम्मी थोड़ी स्माइल कर दी. फ़िर मम्मी भी बैठ कर चाय पीने लगी.
अंकल =रोहन कहाँ हैं.
मम्मी = अंदर कमरे मे है.
अंकल =मुझे अब यकीन हो गया है कि जो बात प्यार और मोहब्बत मे है वो झगड़े मे नहीं.
मम्मी =यही मैं सोच रहीं थीं कि आखिर ऐसी कौनसी बात हो गई जो आप दोनों के बीच इतनी दुश्मनी हो गई.
अंकल =खेर भाभी जी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. और अब सब कुछ अछा हो गया सिर्फ और सिर्फ आपकी बजह से.
मम्मी के चेहरे पर खुशी के भाव दिखने लगे.
अंकल = मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूं..
मम्मी = जी कहिये..

अंकल = मुझे एक कोन्टरेक्ट मिला है पूरे 50 लाख का उसी सिलसिले मे कल 10 दिन के लिए मुंबई जाना होगा. तो अब आप मुझे बताईये की ये जो कोन्टरेक्ट है मुझे लेना चाहिए या नहीं.
मम्मी =जी ये आप मुझसे क्यूँ पूछ रहे है.
अंकल =क्यूंकि आप बहुत समझदार और बहुत खूबसूरत औरत है.
मम्मी = (थोड़ी चौंक कर) जी क्या मतलब..?
अंकल = जी मेरा मतलब यह है कि केसे एक औरत मुश्किल परिस्थिति मे अपने घर को उस मुश्किल परिस्थिति से निकाल लेती है. और यही खूबी आपमें है जो हमे बहुत पसंद आयी.
इसीलिए मैं आपसे पूछने आया हूं.
मम्मी = असलम जी औरत में सिर्फ घर चलाने की खूबी होती है बिजनेस करने की नहीं. और बिजनेस तो आप अछे से जानते है.
अंकल = हाँ, लेकिन वो क्या है ना कि कुछ भी बड़ा काम करने से पहले अपनों से राय, मशवरा कर लेना चाहिए. प्लीज बुरा मत मानियेगा…
मम्मी = काम अगर दिल से करोगे तो फायदा तो जरूर होगा. ले लीजिए आप अछा है.



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