विनीता की अकड़ और चुत दोनों ढीली की

(Vinita Ki Akad Aur Chut Dono Dhili Ki)

हाय दोस्तो.. मैं रोहित लखनऊ से हूँ. मेरी उम्र 35 साल की है. आज मैं आपको अपनी तमाम सेक्स कहानियों में से एक और कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो कि जयपुर में रहने वाली एक मस्त माल विनीता की है. विनीता मेरी एक अन्य दोस्त की सहेली है. वो जयपुर में एक एनजीओ में टॉप की अधिकारी है. उसकी उम्र लगभग 30 साल की है. वो एक बहुत कड़क स्वभाव की अफसर है. लेकिन देखने में बेहद मस्त है. उसका अपने पति से अलगाव हो चुका है. उसकी फिगर कातिलाना है. लम्बा कद, रंग गोरा, मस्त चूचियाँ और सेक्सी चूतड़, जिन्हें देखते ही उसकी गांड मारने की इच्छा जागृत हो जाए.

उसके कड़क स्वभाव के चलते उसके ऑफिस के बाकी कर्मचारी उससे काँपते हैं भले ही पीठ पीछे उसको देख कर मुठ मारें. विनीता हमेशा मर्दों को हड़काये रखती थी और कभी भी दबती नहीं थी. उसने अपने जीवन में कभी किसी से सेक्स सम्बन्ध नहीं बनाए क्योंकि उसे पसंद नहीं था कि कोई उसके ऊपर चढ़े. उसकी अपने पति से भी इसीलिए नहीं बनी क्योंकि विनीता बिस्तर में उसके नीचे आ कर चुदवाने को तैयार नहीं थी और लंड की सवारी ही गाँठना चाहती थी. ऐसी ही बातों के चलते दोनों में तनाव बढ़ता गया और दोनों अन्ततः अलग हो गए. चूँकि विनीता अब स्वतंत्र थी लिहाजा अपने एनजीओ की जॉब के साथ जयपुर में अकेले ठाठ से रहती थी. उसके मर्दों से केवल प्रोफेशनल रिश्ते होते थे. उसमें न जाने कौन सी ग्रन्थि थी, जिसके चलते वो मर्दों से दूरी बनाए रखती थी. हालाँकि किसी भी मर्द से बड़े कायदे से मिलती थी.

खैर मेरी दोस्त ने उससे परिचय कराया और मुझसे भी वो बहुत कायदे से.. लेकिन प्रोफेशनल तरीके से मिली. मैं उसके हुस्न को देखकर दंग रह गया और वहीं ठान लिया कि इसको अपने लंड के नीचे किसी भी तरह लाना ही लाना है. उससे एक पार्टी में मुलाकात हुई. उससे मिलने के बाद मेरा लंड पूरी पार्टी में टनटनाया ही रहा और मैंने पूरे समय उसका चक्षुचोदन किया. खास कर उसकी मस्त गांड मुझे पागल बनाये जा रही थी. मैं उससे पहले प्रोफेशनल रिश्ते बनाना चाहता था, जिससे मुझे उससे नियमित मिलने का मौका मिल सके. मुझे अपने पर पूरा विश्वास था कि मैं इसकी अकड़ अपने लंड से ढीली कर दूंगा.

चूँकि मैं स्टेशनरी की थोक सप्लाई करता था लिहाजा मैंने उससे उसके एनजीओ में स्टेशनरी सप्लाई करने की पेशकश की और उसे भारी रियायत देने का ऑफर दिया. उसने मुझसे इस बारे में जयपुर आकर विस्तार से बात करने को कहा. मैं तैयार हो गया और अगले ही सप्ताह जा कर एक शुरूआती डील पक्की कर ली और इसी बहाने उसका भरपूर चक्षुचोदन किया लेकिन मेरा टॉरगेट तो असली चोदन कार्य करना था लेकिन विनीता जैसी अकड़ू महिला को चुदाई के लिए तैयार करना एक चुनौती भरा कार्य था और ये काम थोड़ा धैर्य वाला था.

धीरे-धीरे उसके एनजीओ की स्टेशनरी की सारी सप्लाई मेरे ही ही फर्म से होने लगी. हालाँकि इसमें मुझे कोई खास लाभ नहीं था. लेकिन मैं जानता था कि जिस दिन विनीता की चूत और उसकी मस्त गांड में मेरा लंड प्रविष्ट होगा उस दिन सारा घाटा पूरा हो जाएगा.

स्टेशनरी सप्लाई के बहाने मैं लगभग हर तीन-चार सप्ताह में जयपुर का चक्कर लगाता था और उसका चक्षुचोदन कर अपना खड़ा लंड ले कर दूसरी चूतों से काम चलाता था. दूसरी लड़कियों को ठोकते समय भी मैं विनीता की ही कल्पना करता था.

धीरे-धीरे मेरी विनीता से अच्छी बनने लगी. चूँकि मैं उसकी दोस्त का दोस्त था इसलिए भी वो मेरा लिहाज कर काफी सलीके से पेश आती थी और मैं तो उसको अपने लंडजाल में फँसाना चाहता था इसलिए कुछ ज्यादा ही शराफत से पेश आता था.
दूसरी बात ये भी थी कि जबसे मैं सप्लाई करने लगा तबसे उसके स्टेशनरी के खर्च में काफी कमी आ गई हालाँकि मैं बिल उसके कहे अनुसार ही देता और इससे उसकी अपनी कमाई में बढ़ोत्तरी हो गई. इन सबके चलते अब वो भी मेरे ऊपर कृपालु होने लगी और एक दिन उसने मुझे डिनर पर बुलाया.

उस दिन मैं मैं पहली बार उसके साथ अकेले लगभग दो घंटे उसके घर रहा और बड़ी मुश्किल से अपने लंड पर कंट्रोल किए रहा. वह ऑफिस में प्रायः साड़ी पहनती थी और वो भी खूब टाइट जिसमें उसकी शानदार गांड खूब उभर जाती थी. लेकिन आज घर पर उसने एक गाउन पहन रखा था, जिसमें से गौर से देखने पर उसके ब्रा और पैंटी की झलक मिल जाती थी. मुझे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था लिहाजा मैंने उसके बाथरूम में जा कर मुठ मार कर खुद को शान्त किया वरना साली का जबरदस्त चोदन ही कर देता.

अब आप जानते ही हैं कि जब एक घर में दो लोग दो घंटे रहें तो कुछ न कुछ निजी बातें होंगी ही. हमारे बीच भी हुई और इसका फायदा ये हुआ कि अब हमारे बीच प्रोफेशनल रिलेशन के साथ ही पर्सनल रिलेशन की भी शुरुआत हो गई. उस दिन तो तो मैं डिनर के बाद वापस लखनऊ आ गया लेकिन अब अपने लंड को नियंत्रण में रखना मेरे लिए संभव में नहीं था लिहाजा मैंने लखनऊ की अपनी सहेली पर जाते ही चढ़ बैठा और भरपूर ठुकाई की.

मैंने अपने जयपुर दौरे में विनीता को अपने लंड का स्वाद चखाने का संकल्प कर लिया चाहे इसके लिए लिए मुझे कुछ भी करना पड़े.

दो सप्ताह बाद मैंने उसको चोदने के संकल्प के साथ जयपुर पहुँचा. मैंने उसके साथ ऑफिशियल मामले निपटाये और इधर-उधर की बातों के बाद उसके पिछले दौरे में दिये गए डिनर की भरपूर तारीफ की. अब कितनी भी भी घंमडी औरत क्यों ना रहे उसे अपनी तारीफ क्यों न अच्छी लगेगी चाहे तारीफ उसके हुस्न की हो या हुनर की.

मैं जानबूझ कर उसके हुस्न की तारीफ नहीं करता था. आखिर हम दोनों मेच्योर थे. इस उम्र में लाइन मारने जैसी कोई हरकत ठीक नहीं थी. लेकिन जो मैं चाहता था वही हुआ. उसने अपनी तारीफ से खुश हो कर मुझे फिर आज डिनर पर आमन्त्रित कर लिया. मुझे एक क्षण के लिए उस दया आई कि बेचारी को क्या पता कि आज उसकी चूत का बाजा बजने वाला है.

बहरहाल उसके घर हम लोग साथ ही पहुँचे. उसने घर पहुँच कर चेंज किया और फिर एक गाउन में आ गई जिसमें गौर से देखने पर उसके ब्रा और पैंटी के दर्शन हो जाते.

उसने मुझसे भी फ्रेश होने को कहा और मैं भी बाथरूम से फ्रेश हो कर बैठ गया. वो किचन में डिनर तैयार करने लगी और मैं भी किचन में ही बैठ कर उससे बातें करने लगा और उसकी मस्त गांड देख कर अपने लंड पर हाथ फेरता रहा. कुछ देर बाद डिनर तैयार हो गया और हम फिर दूसरे कमरे में आ गए. वहाँ विनीता कुछ र्स्टाटअप ड्रिंक लाई जो खाने के पहले लेना था. उसने ये ड्रिंक्स दो गिलासों में निकाले. इसी बीच मैंने उससे सादा पानी माँगा और वो फिर पानी लेने किचन में चली गई. अब मैंने फुर्ता से अपने जेब से एक दवा निकाल और विनीता के ड्रिक में मिला दिया. ये एक ऐसी दवा थी जिसका असर धीरे-घीरे और कुछ देर बाद होना शुरू होता और यह पीने वाले को सेक्सुअली उत्तेजित करती. इसकी खूबी ये थी कि इसके असर से उस व्यक्ति को ये नहीं महसूस होता कि उसे दवा देकर उत्तेजित किया गया है. उसे ऐसा लगता कि उसने भावावेश में आकर अपना समर्पण कर दिया है. यानी ये दवा मनोवैज्ञानिक ढ़ग से भी असर करती थी.

जब विनीता पानी ले कर आई तो उसने भी मेरे साथ वो र्स्टाटअप ड्रिंक लिया. मैं अब निश्चिंत था कि अब तो ये मेरे लंड के नीचे आ ही जाएगी. थोड़ी देर बाद हम लोगों ने डिनर लिया और डिनर के बाद थोड़ी देर के लिए आराम करने को बैठे.

मेरी ट्रेन दो घंटे बाद थी. हालाँकि मैं जानता था कि मुझे जाना नहीं हैं और आज की रात विनीता के साथ ही बिस्तर गर्म करना है. अब मैं जानबूझ कर उससे व्यक्तिगत और भावनात्मक बातें करनी शुरू कर दी क्योंकि मैं जानता था कि अब दवा का असर शुरू हो जाएगा.

मैं यही चाहता था कि विनीता को उसकी चुदाई के बाद ऐसा ही महसूस हो कि उसने भावुकता में चुदवा लिया है न कि दवा के असर से.

धीरे-धीरे दवा और मेरी बातों ने असर दिखाना शुरू कर दिया और विनीता के चेहरे के भाव बदलने लगे. वो मेरी तरफ प्यासी निगाहों से देखने लगी. मैं समझ गया कि लोहा गर्म है.

अचानक मैं उठा और मैंने उससे कहा कि अब मुझे चलना चाहिए.
उसने समय देखा और बोली कि अभी तो एक घंटा बाकी है.
मैंने कहा कि मुझे नींद आ रही है और अब चल कर ट्रेन में ही सोना चाहता हूँ.
उसने कहा- थो़ड़ी देर यहीं आराम कर लो, फिर चले जाना.

मैं यही चाहता था. उसने मुझे एक कमरे में लगे बिस्तर पर सोने को कहा और खुद उसी कमरे में बिस्तर के पास ही एक कुर्सी पर बैठ गई. मैं सोने का नाटक करने लगा. मेरा लंड वैसे ही परेशान कर रहा था. फिर अचानक मुझे ऐसा लगा कि कि विनीता मेरे बालों को सहला रही है. मैंने कनखियों से देखा. वो वास्तव में ऐसा ही कर रही थी. मैं समझ गया कि अब उसके चूत भेदन का वक्त आ गया है. थोड़ी देर तक ऐसा ही चलता रहा फिर मैं अचानक उठ गया. वो हड़बड़ा गई जैसे उसकी चोरी पकड़ में आ गई हो और वो झेंप गई.

मैंने उसकी ओर देखते हुए कहा- अब ट्रेन का समय हो गया है, अब मैं जा रहा हूँ.
वो कुछ नहीं बोली.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो चुप रही.
मैं तो उसकी मानसिक स्थिति से वाकिफ था लिहाजा मैंने हिम्मत करके उसका चेहरा पकड़ लिया और पूछा- क्या बात है? कोई परेशानी है?
वो फिर चुप रही तो मैंने पूछा- मैं ना जाँऊ आज?
उसने आँखों से संकेत किया कि हाँ मत जाओ.
मैंने कहा- ठीक है नहीं जाता हूँ लेकिन तुम्हें क्या हो गया? कुछ बोल क्यों नहीं रही हो?

वैसे मुझे तो पता था कि बेचारी कैसे बोलती कि उसके चूत में खुजली हो रही है जिसे वो मिटावाना चाहती थी.

मैंने अपनी पूरी हिम्मत उठाई और खुद से बोला कि बेटा रोहित अब मार दे छक्का वरना जीवन भर अपनी निगाह में छक्का बना रहेगा.

मैंने अचानक विनीता को अपनी बाँहों में कस लिया और वह कुछ सोचे-समझे उसके पहले मैंने उसे दीवाल से लगा दिया और उसके होठों को अपने होठों की गिरफ्त में ले लिया. दवा का असर था लिहाजा उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया और चुपचाप मुझे अपनी बाँहों में कस कर मेरे चुम्बन का मजा लेने लगी.

दीर्घ चुम्बन के बाद मैंने उसकी गांड में हाथ डाल कर अपनी गोद में उठाया. साली मेरे गले में ऐसे हाथ डाल झूल गई जैसे मेरी पुरानी प्रेमिका हो. अपनी विजय पर फूलता हुआ मैं उसे उठा कर उसके बेडरूम में ले गया और कुछ ऊपर से उसके बेड पर छोड़ दिया.

साली का बेडरूम बहुत आलीशान था. अकेली रहने वाली औरतें अपने बेडरूम को काफी शानदार रखती हैं.

उसको बेड पर लिटाने के बाद मैं भी उसके बेड पर आ गया. इसके पहले मैंने कमरे की लाइट ऑफ कर सिर्फ एक हल्का नीली रोशनी वाला बल्ब जलने दिया क्योंकि अब ब्लू फिल्म की शुरुआत होने जा रही थी.

मैं विनीता की बायीं तरफ लेट गया और अपने बायें हाथ को विनीता की गरदन के नीचे कर उसे अपने करीब कर लिया और उसी हाथ से उसके चेहरे को अपनी तरफ घुमाते हुए अपने होंठ फिर उसके होठों पर रख दिया. कुछ देर ऊपर ऊपर चूमने के बाद मैंने विनीता के होठों को अपने होठों में ले लिया और पके आम की तरह चूसने लगा. विनीता मदहोशी में भर चुकी थी.

अब मैंने उसके होठों से यौवन का रस चूसते हुए अपने दायें हाथ से उसके गाउन को उसके जांघों तक सरका दिया और उसके केले के तने जैसी चिकनी और रेशमी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया. वाकयी साली की जांघें भी बहुत मस्त थी. मेरे हाथ जैसे किसी रेशमी चीज पर फिसल रहे थे. करीब दस-बारह मिनट उसकी रेशमी जांघों को सहलाने के बाद मैंने उसके होठों को अपने होठों में लिए हुए ही उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अपनी उंगलियां पहुँचा दीं. विनीता कसमसा रही थी लेकिन मैं अपनी टांगों से उसको दबोचे हुए था. उसका मुँह मैंने अपने होठों से बंद किया था. लिहाजा बेचारी कोई प्रतिरोध नहीं कर पा रही थी.

थोड़ी देर ही बाद मैंने महसूस किया कि उसकी पैंटी गीली हो गई. मैं पहली मंजिल पर मैं सफलता पूर्वक पहुँच गया. विनीता अब गर्म हो चुकी थी. लेकिन अभी साली को और गर्म करना था.

अब मैंने उसे अपने कब्जे से मुक्त किया. बेचारी जैसे हाँफ रही थी. मैंने उसे उठा कर बिठा दिया और उसके गाउन को पीछे से खोल दिया और जब उसके सर से निकालने लगा तो उसने यन्त्रवत अपने हाथ ऊपर कर दिये. मैं समझ गया कि अब यह चुदवाने को तैयार है. लेकिन मैं अभी उसके मखमली बदन का मजा लेना चाहता था. हालाँकि मेरा लंड अब उसकी चूत में घुस कर उसके मानमर्दन को बेचैन था.

अब विनीता केवल सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में थी. नीली रोशनी में उसकी सफेद ब्रा और पैंटी बहुत मस्त लग रही थी. आखिर एक मस्त माल के यौवनागों की रक्षक जो थीं. मैं विनीता के पीछे आ गया और उसे अपनी जांघों को खोल कर उसके बीच में लगभग अपनी गोद खींच लिया. मैं खुद भी अपने कपड़े उतार कर केवल जॉकी में आ गया था. मेरा लंड इतना कड़ा और बड़ा हो चुका था कि उसका सुपाड़ा मेरी जॉकी से बाहर दिख रहा था.

अब मेरा लंड विनीता की गांड पर रगड़ खा रहा था. मुझे लड़कियों की गांड पर अपने लंड का अहसास कराना बहुत पसंद है. मैं उसकी गांड पर अपने लंड का अहसास कराते हुए उसकी गर्दन और कान के नीचे चूमने लगा. विनीता सिसकने लगी. मैं साथ ही साथ ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को भी बड़े प्यार से दबा रहा था. पहले तो मैंने दोनों हाथों से विनीता की चूचियों का मर्दन किया, फिर एक हाथ उसकी पैंटी पर ले गया.

विनीता की चूत के पानी से उसकी पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी. अब मैंने विनीता की चिकनी पीठ पर पचासों चुम्बन जड़े. विनीता की सिसकियाँ आहों और कराहों में बदल गई थी. मैंने इस मदहोशी के आलम में भी वो मुझसे चूत में लंड पेल कर चोदने के लिए कहने से बच रही थी. हालाँकि उसका शरीर चिल्ला रहा था कि मुझे चोदो.

मैं समझ गया कि ये मर्दों के प्रति अपनी ग्रन्थि के चलते मुझसे चोदने को नहीं कह रही है. मैंने भी सोचा कि साली एक बार कायदे से चुद जाएगी, तभी इसकी अकड़ ढीली होगी.
बहरहाल मैंने फिर उसकी गांड को पकड़ कर अपने लंड पर रखा और उसे अपनी बायीं ओर झुकाते हुए उसे स्मूच करने लगा और एक हाथ से उसकी चूची को दबाते हुए दूसरा हाथ से उसकी चूत से खेलने लगा.

तिनतरफा हमले से विनीता की हालत खराब हो गई और उसकी ‘उह.. आह..’ की आवाज तेज हो गई. वो लगभग छटपटाने लगी. मैंने उसकी इस हालत का थोड़ी देर तक मजा लिया और फिर अचानक उसे पूरी तरह अपनी पकड़ से मुक्त कर दिया और उसे लिटा दिया.

विनीता चौंक गई और अपनी बड़ी बड़ी अधखुली आँखों से मुझे देखने लगी. उसकी आँखें मुझसे चोदने की अपील कर रही थीं. मैंने भी सोचा अब साली को पेल ही दिया जाए. लंड चुसवाने और चटवाने जैसे बाकी काम बाद में होंगे. एक बार साली कायदे चुद जाए और इसे लंड का चस्का लग जाए फिर तो ये मेरी पर्सनल रंडी बन जाएगी.

मैंने अब विनीता की ब्रा और पैंटी निकाल दी. साली ने अपनी झांटें बिल्कुल साफ रखी थीं, जैसे उसे पता हो कि आज उसे चुदवाना है. उसकी चूत और चूचियाँ दोनों 18 साल की लौंडिया की तरह थीं.. अपने परफेक्ट शेप में थीं. किसी 18 साल की लौंडियों की चूचियां तो मसल कर और दबा कर डेवलप करनी पड़ती हैं.

मैंने अब विनीता को पेट के बल लिटाया और उसकी गर्दन से लेकर उसकी गांड तक चुम्बनों की बौछार कर दी. साली की गांड तो उसके शरीर का सबसे मस्त पार्ट था. मैंने उसके दोनों चूतड़ों पर हल्के दांतों से काटा और हल्के हाथ चपत लगाई. मन तो कर रहा था कि साली की गांड पर जबरदस्त थप्पड़ मार मार कर गांड लाल कर दूं, लेकिन ये काम भी मैंने आगे के लिए छोड़ दिया. लेकिन चूँकि मैं लौंडियों की गांड का शौकीन आदमी हूँ, लिहाजा मैंने विनीता की गांड का मुआयना किया. साली की गांड थी तो बहुत मस्त लेकिन अभी गांड मारनी नहीं थी, लिहाजा मैंने विनीता की गांड को चूम-चाट कर छोड़ दिया और उसे सीधे लिटा दिया.

विनीता की आँखें मस्ती के मारे बंद थीं. मैंने अब एक तकिया लिया और विनीता के चूतड़ों के नीचे लगा दिया. अब विनीता की झांटमुक्त चूत मेरे सामने थी जिसमें से अभी भी चूतामृत आ रहा था. अब मैंने विनीता के तलवों से ले कर जांघों तक चूमना और चाटना शुरू कर दिया. विनीता की चिकनी जांघों को चूमने का अनुभव मजेदार था. मैंने साली के तलवे भी चाटे और उसके पैरों के अंगूठों को भी मुँह में ले कर चूसा. सेक्सी लौंडियों में शरीर पर कहीं मुँह मारो, रस मिल जाता है.

उधर विनीता मस्ती के मारे जैसे चिल्ला रही थी. इसके बाद मैं विनीता की चूत में लंड पेलने के पहले अन्तिम काम करने लगा. मैं विनीता की जांघों के बीच अपना मुँह लाया और उसके हुस्न के खजाने यानि चूत पर अपने होंठ रख दिये और अपने दोनों हाथों से विनीता की चूचियां मसलने लगा.

जब मैंने उसकी चूचियों पर अपना हाथ पहुँचाया तो मेरे हाथ उसके हाथों से टकराया. साली खुद अपनी चूचियों को मसल रही थी. मैंने उसके हाथों को हटा कर ये काम खुद अपने हाथों में ले लिया. मैंने उसकी चूत को चूमने के बाद उसकी चूत की फाँकों को चौड़ा कर उसमें जहाँ तक हो सका अपनी जीभ नुकीला कर के डाल दिया और अन्दर ही अन्दर घुमाने लगा. साथ ही हाथें से कुचमर्दन भी कर रहा था.

विनीता ने अपने दोनों हाथों से मेर सर को पकड़ लिया और अपनी चूत पर दबाने लगी. उसने अपनी दोनों टांगों को मेरी गर्दन में फँसा कर मेरे मुँह को अपनी चूत में दबा लिया और अपने हाथों को मेरे सिर के बालों में घुमाने लगी. ये उसकी पहली हरकत थी जिससे उसके सहयोग का संकेत मिला.

कुछ ही देर में उसने ‘उह.. आह..’ करते हुए अपने चूतामृत से मेरे मुँह को भर दिया. मैंने भी उसे प्रसाद की भाँति ग्रहण किया. मैंने मन ही मन कहा कि पिला ले मेरी जान, तुझे भी मैं अपना लंडामृत पिलाउंगा. तब तक तेरी चूत का ये अमृत उधार रहा.

खैर झड़ जाने के बाद विनीता निढाल हो गई. लेकिन असली काम तो अब शुरू होने वाला था. मैं उठा और थोड़ा पानी पी कर अपना मुँह साफ किया और एकाध इलायची खा कर अपना मुँह सुगन्धित किया. इस विनीता अपनी आँखें बंद किए चुपचाप बिस्तर पर पड़ी रही.

मैं बिस्तर पर फिर आ गया. साली ने अपना बेड भी खूब लम्बा-चौड़ा बनवाया था.. साथ ही उस पर बिस्तर भी खूब गद्देदार थे. यानी माल पेलने के लिए आदर्श बेड था. मैंने विनीता के बगल में लेट कर ज्यों ही उसे छुआ वो तड़प कर मुझसे लिपट गई. उसका बदन जल रहा था. मैं समझ गया कि इसे दुबारा गर्म करने की जरूरत नहीं है.

मैंने विनीता का भरपूर चुम्बन लिया और उसे पेलने की तैयारी करने लगा क्योंकि मेरा लंड भी अब अपना धैर्य छोड़ने की तैयारी में था. मैंने विनीता को सीधे लिटाया. उसकी गांड के नीचे तकिया लगा ही हुआ था. मैंने विनीता की चूत की फाँक को चौड़ा कर उसमें अपने लंड का सुपाड़ा फँसाया और विनीता के जिस्म पर आ गया और उसके होठों को हल्के से चूमा और उसके कानों में फुसफुसाया- पेल दूँ डार्लिंग, लूट लूँ तेरी इज्जत?

साली क्या बोलती. उसने एक गहरी साँस ली और अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया. लेकिन मैंने उसका मुँह फिर सीधा करते हुए उसके होठों को मजबूती से अपने गिरफ्त में लिया और लंड को जोरदार झटका दिया, लेकिन साली की चूत बहुत कम और लम्बे समय से न चुदने के कारण बहुत टाइट थी लिहाजा मेरा लंड एकाध इंच ही अन्दर गया और वो छटपटा उठी लेकिन मैंने उसे इस तरह कब्जाया हुआ था कि बेचारी कुछ न कर सकी.

इसी बीच मैंने फिर अपनी पूरी ताकत से झटका दिया. अबकी बार मेरा लंड काफी हद तक उसकी चूत में पेवस्त हो चुका था.
उसने किसी तरह अपना होंठ मेरे होठों से मुक्त कराया और इतने देर में पहली बार बोली- प्लीज लीव मी. इट्स पेनिंग.

लेकिन मैं इतने मुश्किल से हत्थे चढ़ी माल कैसे छोड़ देता. मैंने दो-तीन झटके देते हुए अपना पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया. पूरा लंड पेलने के बाद मैं रुक गया और विनीता के रसीले होठों को चूमते हुए उसे सांत्वना दी कि अभी सब ठीक हो जाएगा और तुम मजे लोगी.

विनीता कुछ नहीं बोली और सिसकारी भरती रही. कुछ देर बाद उसकी गांड में हरकत हुई और मैंने सारी दया-मया किनारे करते हुए अपने लंड को विनीता की चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू किया.

थोड़ी देर तक तो मेरी रफ्तार सामान्य रही लेकिन उसके बाद मैंने तेजी से विनीता का चूतभंजन करने लगा. मैं अपनी किसी भी माल की पहली चुदाई मिशनरी स्टाइल में ही करता हूँ क्योंकि इसमें समान अंगों को समान अंग से रगड़ मिलती है, जो लड़की को भावनात्मक तरीके से करीब करती है. इसलिए मैं विनीता का भी चोदन मिशनरी स्टाइल में ही कर रहा था.

मैंने अपनी चुदाई की गति काफी तेज कर चुका था. चुद रही थी विनीता की चूत लेकिन फट रही थी उसकी गांड. क्योंकि काफी अरसे के बाद चुदने के कारण उसे प्रथम चुदाई का अनुभव हो रहा था. इधर मुझे भी ऐसा ही लग रहा था कि मैं उसकी चूत का उद्घाटन कर रहा हूँ. बेचारी विनीता चिल्ला रही थी लेकिन उसके साउंड प्रूफ कमरे में मेरे अलावा उसकी चिल्लाहट कौन सुनता. मुझे उसका चिल्लाना और उत्तेजित कर रहा था और मैं बेरहमी से विनीता को चोदने में भिड़ा था.

अब साली लंड के नीचे आने के बाद कर ही क्या सकती थी. बेचारी चिल्लाती रही, गांड हिलाती रही और झड़ती रही. मुझे उसको चोदते हुए लगभग 20 मिनट बीत चुके थे और मैं भी झड़ने के कगार पर पहुँच गया और उसके चौथी बार झड़ने की बारी मैं भी झड़ गया और भरपूर झड़ा. झड़ने के बाद मैं विनीता के ऊपर ही तब तक लेटा रहा, जब तक कि मेरा लंड सिकुड़़ कर बाहर नहीं आ गया.

हम दोनों माल झड़े कि विनीता की चूत से हमारा माल निकल कर उसकी गांड तक पहुँच गया था. मैंने विनीता के चेहरे की तरफ देखा. वो आखें बंद किए पड़ी थी. मैं अपने अनुभव से उसके चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव आसानी से पढ़ रहा था लेकिन इसके साथ ही उसके चेहरे पर झेंप के भी भाव थे.

कुछ देर बाद वो उठी और बाथरूम की तरफ बढ़ी. मैं चुपचाप देखता रहा. उसकी नंगी गांड बहुत मस्त लग रही थी. वो बाथरूम में घुस गई. लेकिन बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं किया. इस बीच मैंने एक साफ्ट ड्रिंक दो गिलासों में निकाला और फिर वही दवा उसके गिलास में मिला दिया. ये करने के बाद मैं भी नंगे ही बाथरूम में घुस गया.

विनीता अपने आपको साफ कर रही थी. मुझे देखकर वो सकपका गई. उसको चोदने के बाद मेरा साहस बढ़ गया था. मैं उसके सामने ही बेहिचक हो कर मूतने लगा. वो भौचक्की हो कर मुझे मूतते हुए देखती रही. मूतने के बाद मैंने अपना लंड साफ किया. मन तो उससे चटवा कर साफ कराने का था लेकिन अभी उसका वक्त नहीं आया था. लेकिन मैं तो उसको साफ कर सकता था.

मैंने आगे बढ़ कर उसकी चूत को पानी से साफ किया. वो चुपचाप मुझे ये सब करने दे रही थी. पूरी तरह साफ हो कर हम दोनों बाहर आये और बेड पर बैठ गए. मैंने उसे ड्रिंक दिया और उसने एक ही साँस में गिलास खाली कर दिया.

मैंने मन में सोचा कि साली आज तुझे रात भर ठुकना है. सबेरे तक तेरी सारी अकड़ ढीली हो जाएगी. यही सोचते हुए मैंने भी अपना गिलास खाली किया और विनीता से पूछा- मजा आया कि नहीं?
वो ‘हाँ’ कहते हुए झेंप रही थी. मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और उसके होठों के पास अपना होंठ ले जाकर बोला- बोलो मेरी जान अच्छा लगा न?

उसने सिर्फ ‘हूँ..’ कहा. मैंने उसका गहरा चुम्बन लिया और उसे अपनी बाँहों में लेकर लेट गया. अभी रात के बारह बज रहे थे. अगला दिन रविवार था. उसकी छुट्टी थी और मेरी तो छुट्टी ही छुट्टी थी क्योंकि मेरी तो ट्रेन ही छूट गई थी. मैंने सोचा आज रात भर इसको चोदा जाए तो ये साली पूरी तरह मेरे कंट्रोल में आ जाएगी तब इसकी गांड भी मारूंगा. अभी तो इसने मेरा लंड का स्वाद भी नहीं चखा है. जब इसे लंड़चट और गांडू बना दूंगा तब इसकी अकड़ पूरी तरह ढीली हो जाएगी.

अब दवा का असर फिर होने लगा. मेरे हाथ विनीता के शरीर पर कामुकता वाले अंदाज में घूमने लगे. बाकी तो पता है क्या हुआ होगा. मैंने रात भर विनीता को खूब चोदा. उसके अंग-अंग का भरपूर मजा लिया. भरपूर पेलाई के बाद हम दोनों लगभग सुबह सो गए.


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